रिकॉर्डर बांसुरी क्या है: बनावट, प्रकार और जर्मन या बारोक प्रणाली
रिकॉर्डर बांसुरी सीटी वाली व्यवस्था की सीधी, लकड़ी या प्लास्टिक की बांसुरी है। इसका जर्मन नाम Blockflöte «ब्लॉक» से आया है — वाद्य के सिर में लगी डाट, जो हवा की धार को खिड़की के तेज़ किनारे की ओर भेजती है। इस व्यवस्था के कारण आवाज़ तुरंत निकलती है, होंठों की ख़ास स्थिति के बिना — इसीलिए रिकॉर्डर बांसुरी को बच्चों के पहले वाद्य के रूप में चुना जाता है।
रिकॉर्डर बांसुरी की बनावट
- चोंच (मुखनली), ब्लॉक और खिड़की वाला सिर — आवाज़ यहीं पैदा होती है।
- आगे सात और पीछे एक छेद वाला मध्य भाग।
- निचला सिरा (घंटी) — उसे घुमाया जा सकता है, ताकि छोटी उँगली आराम से सबसे निचले छेद तक पहुँचे।
ज़्यादातर आधुनिक बांसुरियों में नीचे के दो छेद दोहरे होते हैं: आधा बंद करके C♯ और D♯ बजाए जा सकते हैं।
रिकॉर्डर बांसुरी सीधी बांसुरी से कैसे अलग है
सीधी बांसुरी में बगल से, छेद के किनारे पर फूँकते हैं, और आवाज़ होंठों की स्थिति पर निर्भर करती है — नए सीखने वाले को आवाज़ निकालना भी मुश्किल लग सकता है। रिकॉर्डर बांसुरी में चोंच में सीटी की तरह फूँकते हैं: आवाज़ तुरंत आती है। सीधी बांसुरी ज़्यादा तेज़ होती है और उसमें चाबियों वाला तंत्र होता है, रिकॉर्डर बांसुरी — सरल, धीमी आवाज़ वाली और सस्ती।
रिकॉर्डर बांसुरी के प्रकार
| प्रकार | सुर | सबसे नीचा स्वर | किसके लिए |
|---|---|---|---|
| सोप्रानिनो | F | F (दूसरा सप्तक) | अनुभवी बजाने वाले |
| सोप्रानो | C | C (दूसरा सप्तक) | बच्चे और शुरुआत करने वाले — सबसे लोकप्रिय |
| अल्टो | F | F (पहला सप्तक) | किशोर और वयस्क, बारोक काल की मुख्य एकल बांसुरी |
| टेनर | C | C (पहला सप्तक) | समूह-वादन, बड़े हाथ चाहिए |
| बास | F | F (छोटा सप्तक) | समूह-वादन, अक्सर चाबियों के साथ |
सोप्रानो लिखे हुए स्वरों से एक सप्तक ऊँची बजती है। हमारे सभी पाठ सोप्रानो रिकॉर्डर बांसुरी के लिए बने हैं।
जर्मन और बारोक प्रणाली
रिकॉर्डर बांसुरियाँ उँगली-स्थिति की दो प्रणालियों में बनती हैं। जर्मन स्वर F को आसान बना देती है, पर कुछ अर्धस्वरों का सुर बिगाड़ती है। बारोक (अंग्रेज़ी) — ऐतिहासिक रूप से सही है, उस पर सभी स्वर साफ़ बजते हैं। पेशेवर शिक्षक बारोक की सलाह देते हैं। विस्तार से — लेख «रिकॉर्डर बांसुरी की उँगलियों की स्थिति» में।
लकड़ी की या प्लास्टिक की
अच्छे निर्माता की प्लास्टिक रिकॉर्डर बांसुरियाँ सस्ती लकड़ी वाली से कम सुर में नहीं बजतीं, नमी से नहीं डरतीं और आसानी से धुल जाती हैं। लकड़ी वाली ज़्यादा गर्म आवाज़ देती हैं, पर देखभाल माँगती हैं: उन्हें धीरे-धीरे «बजाकर तैयार» करना पड़ता है और तेल लगाना पड़ता है। सीखना शुरू करने के लिए प्लास्टिक बेहतर है — विस्तार से लेख «रिकॉर्डर बांसुरी कैसे चुनें» में।